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अगर वक्फ बिल में कुछ कमी है तो उसे ठीक करके उसके बाद लाया जाना चाहिएः खरगे

नई दिल्ली, 3 अप्रैल माहौल बना है, जिससे ध्वनित होता है कि यह अल्पसंख्यकों को परेशान करने के लिए लाया गया है। लोकसभा में यह बिल जितने कम अंतर से पास हुआ, वह यह प्रदर्शित करता है कि इसमें कुछ खामियां हैं। जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला तरीका छोड़ना होगा। यह दान करने का बिल है। यह कोई और तरीके से दान लाने का बिल नहीं है। इसमें अल्पसंख्यकों के हक हकूक का ख्याल रखा जाना चाहिए। सदन में मौजूद गृहमंत्री अमित शाह से उन्होंने अपील की कि अगर बिल में कुछ कमी है तो उसे ठीक किया जाना चाहिए और उसके बाद इसे लाया जाना चाहिए।

अल्पसंख्यक विभाग को आपने पिछले पांच साल में 18,274 करोड़ में से 3,574 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए। इससे लगता है कि आप अल्पसंख्यकों का ढंग से ख्याल नहीं रख रहे हैं। अल्पसंख्यकों के पांच कार्यक्रम आपने बंद कर दिया। 1995 और 2013 के एक्ट को सर्वसम्मति से स्वीकार किया लेकिन आज उसमें संशोधन किया जा रहा है। इसमें कुछ नए क्लॉज जरूर जोड़े गए हैं लेकिन उनसे अल्पसंख्यकों का भला नहीं होने वाला है। मेरी अपील है कि ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिए जो हमारे धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नष्ट करे। यही चंद बातें कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं और साथ ही इस बिल का पुरज़ोर विरोध करता हूं।

कांग्रेस सदस्य इमरान प्रतापगढ़ी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार ने वक्फ बिल का नाम ‘उम्मीद’ रखा है। पर सच्चाई ये है कि न ये बिल मुसलमानों के लिए उम्मीद है और न उम्मीद की किरण। आज मैं अपने हमवतन भाई-बहनों से पूछना चाहता हूं कि आपको अपने बच्चों की नौकरी और खुशहाली की दरकार है, या फिर मुसलमानों की दान की गई जमीनों को धन्ना सेठों को देने की साजिश करने वाले कानून की? जब ये सरकार रात के 3 बजे पूरे देश को जगाकर, अपने ही नागरिकों को नीचा दिखाने के लिए वक्फ बिल ला रही थी, उस वक्त अमेरिका हमारे ऊपर 26% टैरिफ लगा रहा था। इस सरकार की प्राथमिकताएं पूरे देश को पता हैं।

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